गठिया (Arthritis) आज के समय में एक बहुत ही आम समस्या है, जो न केवल बढ़ती उम्र वालों को बल्कि युवा लोगों को भी प्रभावित कर रही है। कई बार मरीज बताते हैं कि उनके जोड़ों के पास छोटी-छोटी गाँठें (Nodules) बनने लगती हैं, जो धीरे-धीरे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में कठिनाई का कारण बन जाती हैं। जानिए गठिया में गाँठ क्यों बनती है? इसका असली कारण क्या है? और आयुर्वेद इसके पीछे क्या दृष्टिकोण देता है?

Jeevan Ayurveda आपको इस लेख में इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से बताता है।

गठिया में गाँठ बनने की प्रमुख वजहें (Main Reasons Behind Nodules in Arthritis)

गठिया में गाँठ बनने की प्रमुख वजहें (Main Reasons Behind Nodules in Arthritis)
Image credit: Healthline

गठिया कई प्रकार का होता है—रूमेटाइड गठिया, यूरिक एसिड वाला गठिया (गठिया वात), ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि। इन सभी में गाँठ बनने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

  1. उच्च यूरिक एसिड की वजह से (Gout – Uric Acid Crystals)

जब शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है, तो ये क्रिस्टल के रूप में जमा होकर

पैरों के जोड़ों,

उंगलियों,

घुटनों
के आसपास कठोर गाँठें (Tophi) बना देता है।
यह गठिया का सबसे दर्दनाक रूप माना जाता है।

  1. रूमेटाइड गठिया में सूजन की गाँठें (Rheumatoid Nodules)

रूमेटाइड आर्थराइटिस में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) जोड़ों पर गलत तरीके से आक्रमण करती है।
इससे

Chronic Inflammation

Soft Tissue Damage
होता है और जोड़ों के पास नरम-कठोर गाँठें बनने लगती हैं।

  1. जोड़ों में कैल्शियम का जमाव (Calcium Deposition)

कभी-कभी कैल्शियम phosphate जमा होकर

खुरदुरी

सख़्त

दर्दनाक
गाँठों का निर्माण करता है। इसे CPPD Disease कहा जाता है।

  1. पुराने चोट या इंफेक्शन का असर

पुरानी स्किन चोट, जोड़ों का infection या बार-बार चोट लगने से भी soft tissue में fibrosis बनता है, जो अंत में गाँठ का रूप ले लेता है।

  1. शरीर में विषाक्त (Toxins) पदार्थों का जमाव – आयुर्वेदिक कारण

आयुर्वेद के अनुसार गठिया की गाँठ बनने का सबसे बड़ा कारण है—
अमा (Toxins), वात दोष की वृद्धि और स्रौतों (Channels) में अवरोध।

जब अमा शरीर के जोड़ों में फँस जाती है और वात इसे हिलाता-डुलाता है, तभी

सूजन,

दर्द,

गर्माहट
और अंत में गाँठ बन जाती है।

गठिया में बनने वाली गाँठों के प्रकार

✔ टॉफ़स (Uric Acid Nodules)

यूरिक एसिड क्रिस्टल से बनी गाँठें।

✔ रूमेटाइड नोड्यूल्स

Autoimmune सूजन से बनी गाँठें।

✔ कैल्सिफ़िक जमा विकल्प (Calcific Deposits)

कैल्शियम जमाव से बनी कठोर गाँठें।

✔ सॉफ्ट टिश्यू सूजन गाँठें

पुरानी सूजन और ऊतक क्षति के कारण।

गाँठ बनने के प्रमुख लक्षण

जोड़ों के आसपास सख़्त या नरम उभार

दबाने पर हल्का दर्द या तेज दर्द

जोड़ों में जकड़न

चलने-फिरने में परेशानी

जोड़ों का आकार बिगड़ना

सूजन और गर्माहट

अगर गाँठ यूरिक एसिड की है, तो दर्द अचानक और बहुत तेज़ होता है।

आयुर्वेद बताता है: गठिया में गाँठ क्यों बनती है?

आयुर्वेद बताता है गठिया में गाँठ क्यों बनती है
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Jeevan Ayurveda के अनुसार 3 मुख्य कारण हैं—

  1. वात दोष का बढ़ना

वात बढ़ने से जोड़ों में सूखापन, दर्द और स्पेस बनता है, जहां अमा या क्रिस्टल फँसकर गाँठ बना देते हैं।

  1. अमा का शरीर में जमाव

गलत पाचन, कब्ज, भारी भोजन से अमा बनती है, जो जोड़ों में जमा होकर गाँठ बनाती है।

  1. धातु क्षीणता और स्नायु विकार

धातुएँ कमजोर होने से जोड़ों का पोषण रुक जाता है और सूजन-गाँठें बनती हैं।

Jeevan Ayurveda का समाधान – बिना ऑपरेशन, प्राकृतिक उपचार

Jeevan Ayurveda का समाधान – बिना ऑपरेशन, प्राकृतिक उपचार
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हमारे क्लिनिक में गठिया और गाँठों का personalized उपचार किया जाता है।

  1. दर्द और सूजन कम करने वाली जड़ी-बूटियाँ

गिलोय

पांदुरंग रस

त्रिफला

अश्वगंधा

पідаहर वटी

पुनर्नवा

रस्ना

एरंड तेल

  1. यूरिक एसिड कंट्रोल करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ

गोक्शुर

वरणादि काढ़ा

वरुण चूर्ण

पाथा

गुडूची सत्व

  1. अमा दूर करने और पाचन सुधारने वाली दवाएँ

हिंगवास्व

अजीमोत्तार

त्रिकटु

सिंधवादि

पंचकोल

  1. पंचकर्म से गाँठ कम करना

बस्ती (Vata control)

लेप

अभ्यंग

संधि धारा

पोटली स्वेदन

इनसे रक्त संचार बढ़ता है और गाँठें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

  1. आहार-विहार (Diet & Lifestyle)

खट्टा-तीखा-नमकीन कम करें

रात का भारी भोजन न करें

दही, मटन, शराब और फ्राइड food बंद करें

हल्का, गर्म, सुपाच्य भोजन

हल्दी, अदरक, लहसुन का सेवन बढ़ाएँ

गठिया की गाँठ से बचाव कैसे करें?

वजन नियंत्रित रखें

पर्याप्त पानी पिएँ

रोज़ाना 20–30 मिनट योग/वॉक

कब्ज न होने दें

ठंडे पानी से जोड़ों को बचाएँ

देर तक बैठने-खड़े रहने से बचें

Jeevan Ayurveda की सलाह

अगर जोड़ों में किसी भी प्रकार की गाँठ बनी हो—

दर्द हो

सूजन हो

चलना मुश्किल हो गया हो

तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। समय रहते आयुर्वेदिक उपचार लेने से गाँठें खुद-ब-खुद पिघलने लगती हैं और जोड़ों की सूजन कम होती है।

हम पूरे भारत में
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की सुविधा प्रदान करते हैं।

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